देवाधिदेव महादेव को समर्पित श्रावण मास (Sawan Maas) पर यूं तो देशभर में भक्तों के व्रत-पूजन का सिलसिला चार जुलाई से ही प्रारंभ हो चुका है, लेकिन देवभूमि उत्तराखंड में स्थानीय मान्यताओं और परंपराओं के अनुरूप 17 जुलाई सोमवार से श्रावण मास का आरंभ माना जायेगा।

श्रद्धालु अगले एक महीने तक व्रत-उपवास, अभिषेक और विशेष पूजन के माध्यम से महादेव की आराधना कर उनकी कृपा पाने का प्रयास करेंगे। इसके लिये प्रदेश के मन्दिरों में खास तैयारियां भी पूरी की जा चुकी हैं। श्रावण का यह महीना हिन्दू पंचांग के अनुसार पांचवां महीना है, जो वर्षा ऋतु और हरियाली को समर्पित है। भगवान शिव की आराधना का इस मास में विशेष महत्व बताया जाता है। ऐसे में यह जानना जरूरी भी हो जाता है कि महादेव की पूजा में किन खास बातों का ध्यान रखा जाये, ताकि भक्त को भगवान की कृपा सरलता से प्राप्त हो सके। ऐसे कुछ उपायों और विधियों के बारे में आइये जानते हैं।

व्रतः श्रावण मास में सोमवार के व्रत का सबसे अधिक महत्व बताया जाता है। मान्यता है कि श्रावण मास महादेव को सबसे अधिक प्रिय है और सोमवार का दिन भी भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। ऐसे में श्रावण मास में सोमवार के दिन व्रत और तप करना बहुत लाभदायक समझा जाता है। शिवपुराण के अनुसार सोमवार के दिन शिवलिंग के विधिपूर्वक अभिषेक और शिवार्चन करने से भक्तों को उनकी कृपा मिलती है।

बिल्वपत्रः बिल्वपत्र यानी बेलपत्र को भगवान शिव का प्रिय माना जाता है। ऐसे में शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाकर भक्त महादेव की कृपा पा सकते हैं। मान्यता के अनुसार शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के बाद कम से कम 11 बेलपत्र चढ़ाये जाने चाहिये, इस दौरान श्रद्धालु निरंतर पंचाक्षरी मंत्र का जाप करता रहे तो महादेव उससे प्रसन्न होते हैं।

ज्योतिर्लिंग दर्शनः श्रावण मास में ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने के लिये जाने को भी अत्यधिक लाभदायक माना जाता है। देशभर में 12 स्थानों पर ज्योतिर्लिंग हैं, माना जाता है कि इन सभी स्थानों पर शिव स्वयं प्रगट हुये। ये ज्योतिर्लिंग हैंः सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकाल, ममलेश्वर, वैद्यनाथ, भीमशंकर, विश्वनाथ, रामेश्वर, नागेश्वर, त्र्यम्बकेश्वर, केदारनाथ और घृष्णेश्वर। मान्यता है कि यदि श्रावण मास में इनमें से किसी भी ज्योतिर्लिंग में दर्शन और पूजन किया जाये तो महादेव की सहज कृपा प्राप्त होती है। हालांकि, यदि भक्त ज्योतिर्लिंग नहीं भी जा सके तो निकटस्थ शिव मन्दिर में पूर्ण विधिपूर्वक पूजन करने से महादेव की कृपा बरसती है।

अभिषेकः श्रावण मास में शिवलिंग के अभिषेक का विशेष महत्व बताया गया है। परंपरा और मान्यता के अनुसार शिवलिंग का दूध,दही से अभिषेक किया जाता है। मान्यता है कि दही से शिवलिंग का अभिषेक करने से कार्यों में आ रही बाधा समाप्त होती है और हर कार्य सिद्ध होता है। इसी तरह दूध का अभिषेक करने से सौभाग्य और शांति की प्राप्ति होती है। ऐसे में भक्तों को शिवलिंग का दूध-दही से अवश्य अभिषेक करना चाहिये।

गंगाजलः गंगाजल का भी श्रावण मास में खास महत्व है। स्वर्ग से उतरकर धरती पर आने से पूर्व मां गंगा को भगवान महादेव ने ही अपनी जटाओं में धारण किया था। यही वजह है कि शिवलिंग के अभिषेक में गंगाजल का प्रयोग करना अनिवार्य माना जाता है। मान्यता है कि गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके अलावा गन्ने के रस से भी शिवलिंग का अभिषेक करना शुभफलदायी माना जाता है।

(नोटः यह जानकारी परंपराओं एवं मान्यताओं पर आधारित है। कृपया श्रावण मास में पूजन की संपूर्ण विधि जानने और पालन करने के लिये विशेषज्ञ धर्माधिकारियों अथवा सुयोग्य पंडितजी से परामर्श अवश्य लें।)

 

 

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