Kailash Gahtori: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को 2022 में विधानसभा पहुंचाने के लिये, अपनी सीट छोड़ने वाले, चम्पावत के पूर्व विधायक कैलाश गहतोड़ी का निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। राजधानी देहरादून के एक अस्पताल में उनका इलाज जारी था। राज्य सरकार गठन के बाद उन्हें उत्तराखंड वन विकास निगम का अध्यक्ष बनाया गया था।

मूलतः चम्पावत निवासी कैलाश गहतोड़ी लंबे समय से काशीपुर में रह रहे थे और सामाजिक कार्यों में सक्रिय थे। काशीपुर में गिरीताल रोड पर उनका आवास है। गहतोड़ी 2017 में पहली बार चम्पावत सीट से विधायक चुनकर विधानसभा में पहुंचे थे। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुये, दोबारा प्रत्याशी बनाया था। गहतोड़ी ने भी पार्टी का भरोसा कायम रखते हुये, दोबारा यहां जीत दर्ज की।

लेकिन, 2022 विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खटीमा सीट पर चुनाव हार गये थे। हालांकि, पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने धामी की कमान में ही दोबारा नयी सरकार का गठन किया। सरकार बनने के बाद छह माह के भीतर धामी को चुनाव जीतना जरूरी था। ऐसे में चम्पावत विधायक कैलाश गहतोड़ी आगे आये और इस्तीफा देकर, अपनी सीट सीएम धामी को सौंप दी।

भाजपा में शामिल हुयी अनुपमा

कैलाश गहतोड़ी का कहना था कि सीएम पुष्कर सिंह धामी उनके क्षेत्र से विधायक होंगे, तो विकास कार्यों में तेजी आयेगी। बाद में, जून 2022 में राज्य सरकार ने कैलाश गहतोड़ी को उत्तराखंड वन विकास निगम का अध्यक्ष बनाते हुये मंत्री स्तर का दर्जा दिया। करीब एक साल से गहतोड़ी गंभीर रूप से बीमार चल रहे थे। कुछ समय तक अमेरिका में भी उनका इलाज हुआ था।

 

कुछ दिन पहले तबीयत बिगड़ने पर उन्हें देहरादून के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार सुबह अस्पताल में उपचार के दौरान उनका निधन हो गया। जानकारी के अनुसार, देहरादून से परिजन गहतोड़ी के पार्थिव शरीर को लेकर काशीपुर के लिये रवाना हो गये हैं। यहां अंतिम दर्शन के बाद उनका अंतिम संस्कार किया जायेगा।

सफल कारोबारी से सफल राजनेता तक का सफर

15 अगस्त 1968 को चम्पावत में जन्मे कैलाश गहतोड़ी का मध्य प्रदेश से भी लंबा नाता रहा। युवावस्था में कैलाश ने मध्य प्रदेश में निर्माण कंपनी के जरिये अपना कारोबार जमाया। उत्तराखंड राज्य गठन होने के बाद वर्ष 2002 में वह उत्तराखंड लौट आये काशीपुर में अपना व्यवसाय शुरू किया। इसी साल उन्होंने लोहाघाट से बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ा, लेकिन असफल रहे।

अगले कुछ साल गहतोड़ी ने काशीपुर में कारोबार बढ़ाने पर ध्यान दिया। आज गहतोड़ी और उनका परिवार काशीपुर में एक होटल और दो स्कूलों का संचालन कर रहा है। सफल कारोबारी के बाद, गहतोड़ी ने 2012 में फिर राजनीति में कदम रखा और भाजपा में शामिल हुये और चम्पावत में जिला पंचायत सदस्य चुने गये।

जिला पंचायत में रहते हुये गहतोड़ी ने अपनी पकड़ बनानी शुरू की। 2017 में भाजपा ने चम्पावत से गहतोड़ी को मैदान में उतारा। इस बार उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी हेमेश खर्कवाल को 17 हजार से अधिक वोटों के अंतर से शिकस्त दे दी। 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने एक बार फिर खर्कवाल को पांच हजार वोटों से हराया।

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उत्तराखंड में सर्वाधिक वोट का बना रिकॉर्ड

कैलाश गहतोड़ी के त्यागपत्र के बाद, उनकी ही अगुवाई में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने चम्पावत से चुनाव लड़ा तो एक नया रिकॉर्ड कायम कर दिया। इस उपचुनाव में सीएम धामी ने 58 हजार 258 वोट हासिल किये, जो कुल मतदान का 92 प्रतिशत से भी अधिक था। उत्तराखंड में अब तक हुये चुनावों में यह किसी प्रत्याशी को मिले सर्वाधिक वोट हैं।

सीएम बोले- मित्र, बड़े भाई का निधन व्यक्तिगत क्षति

वन विकास निगम के अध्यक्ष, पूर्व विधायक, प्रिय मित्र और बड़े भाई श्री कैलाश गहतोड़ी जी के निधन का पीड़ादायक समाचार सुन स्तब्ध हूं। कैलाश जी का जाना संगठन, प्रदेश के साथ-साथ मेरे लिए भी व्यक्तिगत क्षति है। आपने अपना पूरा जीवन जनसेवा में खपा दिया, आप एक आदर्श जनप्रतिनिधि के रूप में सदैव याद किए जाएँगे। एक विधायक के रूप में चम्पावत क्षेत्र के विकास के प्रति आपका समर्पण हमारे लिए प्रेरणास्रोत है।

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भाजपा अध्यक्ष, केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री ने दी श्रद्धांजलि

राज्यसभा सांसद और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि वन विकास निगम के अध्यक्ष, पूर्व विधायक श्री कैलाश गहतोड़ी संगठन के प्रति समर्पित कार्यकर्ता थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन जनसेवा में समर्पित कर दिया, आप एक आदर्श जनप्रतिनिधि के रूप में सदैव याद किये जायेंगे।

वहीं, केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट ने लिखा है- गहतोड़ी जी के निधन का दुःखद समाचार प्राप्त हुआ। मैं ईश्वर से पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने और शोक संतप्त परिजनों को इस असीम दुख को सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना करता हूँ।

 

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